प्यास के पीछे के विज्ञान की कहानी Science Behind Human Thirst

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पानी सभी जीवों के लिए जरूरी है। इसी की वजह से हम इस धरती पर जीवित है। भोजन से ज्यादा जरूरी पानी है। एक मानव शरीर 60% पानी से बना है। मानव शरीर में आन्तरिक क्रियाओ का लगातार चक्र चलता रहता है जिसमें पानी की अहम भूमिका है। एक स्वस्थ मानव को दिन में 8 से 10 गिलास पानी पर्याप्त है। प्रथ्वी पर 71% पानी है। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी कठिन है।

शरीर पहुंचाता है संदेश

विज्ञानिको के अनुसार जब हम भूखे होते है और खाना खाते है तो पेट भर चूका है। यह संदेश हमारे मस्तिष्क तक पहुंचाने में शरीर को लगभग 20 मिनट का समय लगता है यही वजह है कि कई बार हम अपनी भूख से ज्यादा खा जाते है। लेकिन प्यास लगने पर ऐसा नही होता है। पानी पीते समय शरीर तुरन्त मस्तिष्क तक संदेश पहुंचाता है और पर्याप्त पानी ही पी पाते है।

पानी पीजिए प्यासे है आप

हमारा शरीर आवश्यक संकेत देकर पानी की कमी की पूर्ति करवाता है। जब हमारे रक्त प्रवाह में तरल पदार्थो की माञा कम होती है तो हमारा शरीर यह एहसास दिलाता है कि हम प्यासे है। खाना खाने के दौरान पानी पीकर पेट भरने से शरीर मस्तिष्क को खाना बंद करने का संकेत भेजता है क्योकि पानी से पेट अब भर चूका है।

कम पानी पीने से त्वचा रूखी व बेजान हो जाती है तथा हमारा शरीर डिहायट्रेटिड महसूस करने लगता है।
जरूरत से ज्यादा पानी ले सकता है जान, हम शरीर में जमा फैट को भविष्य में एनर्जी के रूप में काम ले सकते है किन्तु पानी के साथ ऐसा नही होता है।

अमरीकन केमिस्ट्री सोसायटी के अनुसार 7 लीटर से ज्यादा पानी 75kg के व्यक्ति को मार सकता है।
जब हम बिना प्यास पानी पीते है तो मूञ के रास्ते हमारे शरीर से आवश्यक सोडियम बाहर निकल जाता है जिससे गुर्दो व मस्तिष्क सहित कई बीमारियों का खतरा बढ जाता है। इस स्थिति को हाइपोनट्रेनिया कहा जाता है।

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